Monday, September 24, 2018

विवेचना- मैं सोच भी नहीं सकती थी इमरान पैर पकड़ लेगा: रेहाम ख़ान

हाम कहती हैं, "सिर्फ़ घरेलू हिंसा ये नहीं होती कि कोई आप पर हाथ उठाए या आपके ऊपर कोई चीज़ उठाकर मार दे. घरेलू हिंसा शुरू ही होती है एक 'कंट्रोल सिचुएशन' से. घरेलू हिंसा करने वाला ये परख लेता है कि वो कहाँ तक जा सकता है. कम उम्र की लड़कियों के साथ घरेलू हिंसा ज़्यादा होती है. मैं अपनी शादी के पहले दिन या कहें पहले घंटे से ही समझ गई थी कि कुछ सही नहीं है."
"घरेलू हिंसा में पति का वित्तीय कंट्रोल बढ़ता चला जाता है. पहले गाली-गलौज शुरू होती है और फिर मारपीट शुरू हो जाती है. आपको इस तरह का अहसास कराया जाता है कि सारी ग़लती आपकी है और अगला बंदा आपको नाकारा, बेकार और बदसूरत कहने लगता है जिसकी वजह से आपकी सारी सेल्फ़ एस्टीम (आत्मविश्वास) ख़त्म हो जाती है."
रेहाम बताती हैं कि अपने पहले पति के साथ साढ़े बारह साल तक रहते हुए उन्हें ये अहसास ही नहीं हुआ कि वो घर में रह रही हैं.
घर का मतलब साफ़-सुथरे बिस्तर और चमकते हुए फ़र्श नहीं होते. अगर घर में बेसाख़्ता लगने वाले ठहाके और उन लोगों की बाहें नहीं हैं जिन्हें आप प्यार करते हैं तो उस घर का कोई मतलब नहीं.साल के कड़वे वैवाहिक जीवन और तीन बच्चे पैदा होने के बाद रेहाम ने अपने पहले पति से तलाक़ ले लिया. तलाक़ लेने के बाद उनके शुरुआती दिन आर्थिक तौर पर मुश्किल भरे थे, लेकिन उन्हें मानसिक शांति थी.
उन्होंने पहले 'लीगल टीवी' में नौकरी शुरू की और फिर बीबीसी टेलीविज़न में. रेहाम याद करती हैं, "जब मैंने तलाक़ की अर्ज़ी लगाई तो मैं सारी अदालती क़ार्रवाई ख़ुद हैंडल कर रही थी. अपने बच्चों को अपने पति से बचाने की भी कोशिश कर रही थी. बिल्कुल पैसे नहीं थे. मेरे पास सिर्फ़ 300 पाकिस्तानी रुपए थे."
"मेरा जो साझा खाता था, वो भी मेरे पति ने ब्लॉक करा दिया था. लेकिन मेरे लिए ज़्यादा मुश्किल थी आगे क़दम बढ़ाना. ये सोचना कि लोग क्या कहेंगे. लेकिन जब मैंने क़दम उठा लिया तो ज़िंदगी बहुत आसान हो गई. मशक्कत ज़रूर करनी पड़ी लेकिन घर का माहौल एकदम से ख़ुशगवार हो गया. बच्चों की मुस्कुराहटें वापस लौट आईं और उनकी आवाज़ सुनाई देने लगी."
फिर अचानक उन्होंने ब्रिटेन में बीबीसी की नौकरी छोड़ दी और वो पाकिस्तान चली गईं, जहाँ वो एक हाई प्रोफ़ाइल टीवी एंकर बन गईं.
इस बीच उन्हें इमरान ख़ान से दो बार इंटरव्यू करने का मौक़ा मिला. इसके कुछ दिनों बाद इमरान ने रेहाम को एसएमएस भेजा कि वो उनसे मिलना चाहते हैं.
कुछ दिन टालने के बाद रेहाम उनसे मिलने उनके घर गईं जहाँ इमरान ने उनसे शादी करने का प्रस्ताव उनके सामने रख दिया.
रेहाम को वो मुलाक़ात अभी तक याद है. वो कहती हैं, "मैं उनके बरामदे में खड़ी थी. इमरान लॉन में अपने कुत्ते को टहला रहे थे. उन्होंने मुझे अपनी तरफ़ बुलाया. मैं झिझकी, क्योंकि मैंने ऊंची एड़ी के जूते पहन रखे थे. लेकिन बीबीसी ने मुझे सिखाया था कि मैं जहाँ-जहाँ भी जाऊँ, अपने साथ बिना हील की फ़्लैट चप्पल ज़रूर ले कर जाऊं."
"मैंने वहीं अपने जूते उतारे और चप्पल पहनकर इमरान की तरफ़ गई. जब मैं उनके बग़ीचे की तरफ़ बढ़ी तो मैंने देखा इमरान ने मेरे जूते उठाकर मेज़ के बीचों-बीच रख दिए हैं, ताकि उनका कुत्ता उन्हें नुक़सान न पहुंचा सके."
उसी दौरान एक दिलचस्प घटना घटी. रेहाम इमरान के लॉन में बैठी हुई थीं कि वहाँ सैकड़ों की तादाद में मच्छरों ने उनके ऊपर हमला बोल दिया.
इमरान अचानक झुके और उन्होंने अपने दोनों हाथों से रेहाम की पिंडलियों को ढक लिया मानो वो उन्हें मच्छरों से काटने से बचा रहे हों.
रेहाम बताती हैं, "शायद मेरा ख़ून कुछ ज़्यादा ही मीठा है. जब वो बाथरूम गए तो सैकड़ों मच्छर मेरे पैर के आसपास मंडराने लगे. अचानक मैं क्या देखती हूँ कि इमरान ने अपने बड़े हाथों से मेरी पिंडलियों को कवर कर लिया. मैं घबराकर खड़ी हो गई. ये उनकी आम छवि से अलग बहुत केयरिंग और रोमांटिक रूप था. मैं सोच भी नहीं सकती थी कि एक शख़्स जो इतनी अकड़ में रहता है, मेरे इस तरह पांव पकड़ लेगा. उसी मुलाक़ात में उन्होंने मुझसे कहा कि वो मुझसे शादी करना चाहते हैं. मैंने उनसे कहा कि क्या आपको पता है कि मैं 42 साल की हूँ? इमरान बोले, ये तो अच्छा है. अब कोई मुझ पर ये आरोप तो नहीं लगाएगा कि मैंने आपको पालने से खींच लिया."
रेहाम ने इमरान का शादी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. फिर उनमें मतभेद हुए लेकिन फिर 31 अक्तूबर 2014 को दोनों का निकाह हो गया. मैंने रेहाम से पूछा कि इमरान की एक 'प्ले बॉय' की इमेज रही है. क्या शादी के बाद भी ये सिलसिला जारी रहा?
रेहाम ने जवाब दिया, "ये सही है कि जब हम किसी से शादी करते हैं तो उसके पुराने रिकॉर्ड को देखते हैं. लेकिन हमारे बड़े-बूढ़े और आंटियाँ कहते थे कि जो शादी के पहले प्ले बॉय होता है, वो शादी के बाद ठीक हो जाता है. ये बिल्कुल ग़लत बात है. मैं अपने तजुर्बे से आपको बता रही हूँ कि ऐसा नहीं होता है. अगर कोई चीज़ किसी आदमी की आदत बन गई है तो उसे बदला नहीं जा सकता. मेरी किताब में एक लाइन है कि इमरान मुझसे कहते हैं, बेबी यू कान्ट टीच एन ओल्ड डॉग, न्यू ट्रिक. कहने का मतलब ये कि आप जो कुछ कर लें, मैं नहीं सुधरने वाला."हले दिन से ही इमरान और रेहाम के बीच दूरियाँ बढ़नी शुरू हो गईं. रेहाम का कहना है कि कुछ बाहरी लोगों और इमरान की पहली पत्नी जमाइमा गोल्डस्मिथ का असर उन पर अभी तक बरक़रार था.
मैंने रेहाम से सवाल किया कि क्या इमरान अपनी पूर्व पत्नी और दूसरी महिलाओं का ज़िक्र कभी उनके सामने करते थे?
रेहाम का जवाब था, "बहुत ज़्यादा, हद से ज़्यादा. लोगों के भी उन्होंने कई क़िस्से मुझे सुनाए. ख़वातीन पसंद नहीं करती कि आप उन्हें अपने 'पास्ट' के बारे में उन्हें बताएं. लेकिन इमरान अपनी एक्स वाइफ़ और एक्स गर्लफ़्रेंड्स के क़िस्से बताते रुकते ही नहीं थे. अब जब मेरी किताब लोगों ने पढ़ी है तो कुछ महिलाओं ने मुझसे संपर्क किया है जो इमरान की ज़िंदगी का हिस्सा रही हैं और कहा है जो क़िस्से आपने किताब में लिखे हैं, वही क़िस्से इमरान ने उन्हें भी बताए थे."
इमरान के 70 की दशक की एक बॉलीवुड अभिनेत्री के साथ क़िस्से बहुत मशहूर थे. इमरान ने रेहाम से इस बात की पुष्टि की कि वो कहानी सही थी.
रेहाम बताती हैं, "इमरान ने मुझसे कहा कि उन्हें उस अभिनेत्री से डर लगने लगा, क्योंकि उसने लंदन तक उसका पीछा किया. उस अभिनेत्री के एक जानने वाले ने मुझसे कहा कि असल में इमरान उसके पीछे लग गए थे और बाद में उस अभिनेत्री ने इमरान के बारे में कहा था, 'नाम बड़े और दर्शन छोटे."
इमरान का रहन-सहन और निजी जीवन की कुछ चीज़ें रेहाम को रास नहीं आईं. इमरान के कैंप से भी उनके ख़िलाफ़ लगातार एक मुहिम शुरू की गई.
रेहाम याद करती हैं, "मैं समझ ही नहीं सकी कि वो अपने दिल में मेरे बारे में क्या सोच रहे हैं. क़रीब-क़रीब पूरा एक साल जो हमने साथ गुज़ारा, वो मेरी तारीफ़ करते थकते नहीं थे. जब मैं कहीं तक़रीर दे कर आती थी या इंटरव्यू देकर आती थी तो वो मेरी इतनी तारीफ़ करते कि मैं शर्मिंदा हो जाती थी. लेकिन मेरी पीठ पीछे मेरे ख़िलाफ़ एक साज़िश रची जा रही थी और इमरान उसका हिस्सा थे. हाँ ये बात सही है कि शादी से पहले भी और शादी के बाद भी जिस तरह से वो पार्टी को चला रहे थे, उस पर मुझे ऐतराज़ था. मैं उनसे शिकायत किया करती थी कि वो किस तरह के लोगों को पार्टी में लेकर आए हैं, जिनमें न कोई वज़ादारी है और न ही इनकी कोई अच्छी राजनीतिक बैकग्राउंड है."
"शादी से पहले तो इमरान कहते थे कि मैं तुम्हारी सलाह पर काम करूंगा. लेकिन शादी के बाद जब मैं यही बात करती थी तो वो मुझे चुप करा देते थे या डांट देते थे. मेरे पार्टी पर हावी होने का तो सवाल ही नहीं उठता था, क्योंकि इमरान मुझसे राजनीति पर बात ही करना नहीं पसंद करते थे. कुछ महीनों के बाद तो उन्होंने मुझसे कह दिया था कि राजनीति के बारे में अगर तुम्हें कुछ बातें करनी हो तो मुझे लिखकर दे दिया करो, क्योंकि शाम का वक़्त तो उनका संगीत सुनने का वक़्त होता था. मुझे ये बात अजीब सी लगती थी."
रेहाम की मानी जाए तो इमरान के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों, काले जादू, जादुई तावीज़ों और इमरान की निजी लाइफ़ स्टाइल ने उन्हें उनसे दूर कर दिया.
रेहाम याद करती हैं, "सच्ची बात ये है कि मैंने आख़िरी वक़्त तक कोशिश की कि मैं इन्हें समझा लूँ. अप्रैल के बाद मुझे ये बात समझ में आ गई थी कि ये स्टेटस-को (यथास्थिति) की पार्टी है और इमरान भी इसे नहीं ठीक कर सकते. काफ़ी अर्से तक मैं समझती रही कि इमरान में हिम्मत नहीं है ग़लत काम करने वालों को रोकने की. उनके अगल-बग़ल जो लोग थे वो करप्ट बैकग्राउंड के लोग थे, लैंड माफ़िया थे."
"उनका एक जानने वाला मुझसे लंदन में मिला और उसने मुझे किचन मनी ऑफ़र की. मुझे ये बहुत अपमानजनक बात लगी, लेकिन इमरान पर इसका कोई असर नहीं हुआ. उस शख़्स के पैसे ही इमरान के घर में आते थे जिससे उनका घर चलता था. मैं इमरान से कहा करती थी कि आज ये शख़्स जो आपको पाँच लाख रुपए दे रहा है, वही आपसे उम्मीद करेगा कि आप उसे पाँच करोड़ रुपए दें, जब आप कुछ बन जाएं."
"इमरान मुझे कुछ काम करने से पहले मुझसे पूछते ज़रूर थे. मसलन वो कहते थे कि ये जो मैं नीली टाई पहने हुए हूँ वो बिल्कुल ठीक है न. जब मैं कहूं कि बिल्कुल ठीक है तो वो जाकर गुलाबी टाई पहन लेते थे. अगस्त आते-आते मैंने उनसे कहना शुरू कर दिया था कि आप मुझसे पूछते क्यों हैं, जब आपको उसकी उल्टी बात ही करनी होती है."

Wednesday, September 19, 2018

इस साल समय पर मूर्ति भारत से पाकिस्तान नहीं प

इस साल समय पर मूर्ति भारत से पाकिस्तान नहीं पहुंच पाई. देव आनंद ने फिर दुबई में रहने वाले भाई को अपनी परेशानी बताई. उनका भाई गणेश की मूर्ति लेकर खुद दुबई से पाकिस्तान पहुंचा.
मूर्ति के पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा की शुरुआत हुई. भगवान गणेश पर मोदक और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाए गए. इसके बाद समुदाय के लोग मूर्ति लेकर नाचते-गाते कराची के रत्नेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे. वहां मूर्ति की विधिवत स्थापना हुई.
रत्नेश्वर महादेव मंदिर क्लिफ़टन इलाक़े में समुद्र के किनारे स्थित है. मान्यता है कि यह मंदिर सैंकड़ों साल पुराना है. गणेश चतुर्थी के दौरान मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इसी मंदिर में होता है.
देव आनंद कहते हैं, "हम लोग यहां करीब 500 की संख्या में जुटते हैं. मराठाओं के अलावा दूसरे हिंदू समुदाय के लोग भी जश्न में शामिल होते हैं. कोई भी इसमें शामिल हो सकता है, किसी तरह की रोक-टोक नहीं होती है."
मंदिर के एक बड़े हॉल में गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है. यहां के हॉल को भी ख़ूबसूरती से सजाया गया है, जहां शाम को सैंकड़ों लोग जुटते हैं.
मंदिर के पुजारी महाराज रवि रमेश गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं. उन पर कई तरह के फल-फूल चढ़ाए जाते हैं. उनकी दूध और शहद से अभिषेक किया जाता है.
महाराज रवि रमेश कहते हैं, "हम हर साल इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं. पूरे सिंध प्रांत से लोग यहां आते हैं."
जो भी लोग यहां आते हैं, सभी एक-एक कर गणेश की पूजा करते हैं. रातभर यह चलता रहता है.
अगले दिन शाम एक बार फिर यहां लोगों का जुटते है और गणेश की मूर्ति को सभी मिलकर अरब सागर में विसर्जित करते हैं.
इस दौरान जयकारे लगाए जाते हैं, गीत गाए जाते हैं. लोग नाचते हैं और मूर्ति विसर्जन के बाद यह त्योहार ख़त्म हो जाता है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का कहना है कि हिंदुत्व एक सर्वसम्मत विचार है जो परम्परा से चला आ रहा है. ये विचार विविधता के सम्मान की वजह से चल रहा है.
दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान माला के दूसरे दिन 'भविष्य का भारत' विषय पर बोलते हुए उन्होंने हिंदुत्व के बारे में चर्चा की.
उन्होंने कहा कि वैदिक काल में हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं था बल्कि सनातन धर्म हुआ करता था.
उन्होंने शिक्षाविद्द सर सय्यद अहमद ख़ान का उद्धरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने यानी ख़ान ने बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की तो लाहौर में आर्य समाज ने उनका अभिनंदन किया. आर्य समाज ने इसलिए अभिनन्दन किया था क्योंकि सर सय्यद अहमद ख़ान मुस्लिम समुदाय के पहले छात्र थे जिन्होंने बैरिस्टर बनने की पढ़ाई की थी.
भागवत बताते हैं, "उस समारोह में सर सय्यद अहमद ख़ान ने कहा कि मुझे दुःख है कि आप लोगों ने मुझे अपनों में शुमार नहीं किया."
व्याख्यान माला के दूसरे दिन भी संघ के आमंत्रण पर कई हस्तियां शामिल हुईं. इनमें जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के सी त्यागी सहित कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे.
इनके अलावा जया जेटली, सोनल मानसिंह और कुमारी शैलजा भी मोहन भागवत को सुनने विज्ञान भवन पहुंचे.
राजनीति पर चर्चा करते हुए भागवत का दावा था कि संघ सम्पूर्ण समाज को जोड़ना चाहता है. राजनीति में मतभेद होते हैं. जब राजनीतिक दल बनते हैं तो विरोध भी खड़ा होता है. इसीलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजनीति से दूर है. उनका यह भी दावा था कि मौजूदा सरकार की नीतियों पर संघ का कोई दख़ल नहीं है.
भागवत कहते हैं, "हमने कभी किसी स्वयंसेवक को किसी दल विशेष के लिए काम करने को नहीं कहा. कौन राज करेगा ये जनता तय करेगी. हम राजनीति से ज़्यादा राष्ट्रनीति के बारे में सोचते हैं. नीति किसी की भी हो सकती है. हमें किसी से बैर भी नहीं है और न ही किसी से अधिक दोस्ती है."
व्याख्यानमाला के तीसरे सत्र यानी बुधवार को मोहन भागवत लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देंगे.
ये प्रश्न लिखित रूप से पूछे जा रहे हैं क्योंकि समारोह में आने वाले हर व्यक्ति को एक फ़ॉर्म दिया गया है जिसके ज़रिये वो अपने सवाल पूछ सकते हैं.