Wednesday, September 19, 2018

इस साल समय पर मूर्ति भारत से पाकिस्तान नहीं प

इस साल समय पर मूर्ति भारत से पाकिस्तान नहीं पहुंच पाई. देव आनंद ने फिर दुबई में रहने वाले भाई को अपनी परेशानी बताई. उनका भाई गणेश की मूर्ति लेकर खुद दुबई से पाकिस्तान पहुंचा.
मूर्ति के पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा की शुरुआत हुई. भगवान गणेश पर मोदक और मोतीचूर के लड्डू चढ़ाए गए. इसके बाद समुदाय के लोग मूर्ति लेकर नाचते-गाते कराची के रत्नेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे. वहां मूर्ति की विधिवत स्थापना हुई.
रत्नेश्वर महादेव मंदिर क्लिफ़टन इलाक़े में समुद्र के किनारे स्थित है. मान्यता है कि यह मंदिर सैंकड़ों साल पुराना है. गणेश चतुर्थी के दौरान मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इसी मंदिर में होता है.
देव आनंद कहते हैं, "हम लोग यहां करीब 500 की संख्या में जुटते हैं. मराठाओं के अलावा दूसरे हिंदू समुदाय के लोग भी जश्न में शामिल होते हैं. कोई भी इसमें शामिल हो सकता है, किसी तरह की रोक-टोक नहीं होती है."
मंदिर के एक बड़े हॉल में गणेश की मूर्ति स्थापित की जाती है. यहां के हॉल को भी ख़ूबसूरती से सजाया गया है, जहां शाम को सैंकड़ों लोग जुटते हैं.
मंदिर के पुजारी महाराज रवि रमेश गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं. उन पर कई तरह के फल-फूल चढ़ाए जाते हैं. उनकी दूध और शहद से अभिषेक किया जाता है.
महाराज रवि रमेश कहते हैं, "हम हर साल इस त्योहार को धूमधाम से मनाते हैं. पूरे सिंध प्रांत से लोग यहां आते हैं."
जो भी लोग यहां आते हैं, सभी एक-एक कर गणेश की पूजा करते हैं. रातभर यह चलता रहता है.
अगले दिन शाम एक बार फिर यहां लोगों का जुटते है और गणेश की मूर्ति को सभी मिलकर अरब सागर में विसर्जित करते हैं.
इस दौरान जयकारे लगाए जाते हैं, गीत गाए जाते हैं. लोग नाचते हैं और मूर्ति विसर्जन के बाद यह त्योहार ख़त्म हो जाता है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का कहना है कि हिंदुत्व एक सर्वसम्मत विचार है जो परम्परा से चला आ रहा है. ये विचार विविधता के सम्मान की वजह से चल रहा है.
दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान माला के दूसरे दिन 'भविष्य का भारत' विषय पर बोलते हुए उन्होंने हिंदुत्व के बारे में चर्चा की.
उन्होंने कहा कि वैदिक काल में हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं था बल्कि सनातन धर्म हुआ करता था.
उन्होंने शिक्षाविद्द सर सय्यद अहमद ख़ान का उद्धरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने यानी ख़ान ने बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की तो लाहौर में आर्य समाज ने उनका अभिनंदन किया. आर्य समाज ने इसलिए अभिनन्दन किया था क्योंकि सर सय्यद अहमद ख़ान मुस्लिम समुदाय के पहले छात्र थे जिन्होंने बैरिस्टर बनने की पढ़ाई की थी.
भागवत बताते हैं, "उस समारोह में सर सय्यद अहमद ख़ान ने कहा कि मुझे दुःख है कि आप लोगों ने मुझे अपनों में शुमार नहीं किया."
व्याख्यान माला के दूसरे दिन भी संघ के आमंत्रण पर कई हस्तियां शामिल हुईं. इनमें जनता दल (यूनाइटेड) के नेता के सी त्यागी सहित कई केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे.
इनके अलावा जया जेटली, सोनल मानसिंह और कुमारी शैलजा भी मोहन भागवत को सुनने विज्ञान भवन पहुंचे.
राजनीति पर चर्चा करते हुए भागवत का दावा था कि संघ सम्पूर्ण समाज को जोड़ना चाहता है. राजनीति में मतभेद होते हैं. जब राजनीतिक दल बनते हैं तो विरोध भी खड़ा होता है. इसीलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजनीति से दूर है. उनका यह भी दावा था कि मौजूदा सरकार की नीतियों पर संघ का कोई दख़ल नहीं है.
भागवत कहते हैं, "हमने कभी किसी स्वयंसेवक को किसी दल विशेष के लिए काम करने को नहीं कहा. कौन राज करेगा ये जनता तय करेगी. हम राजनीति से ज़्यादा राष्ट्रनीति के बारे में सोचते हैं. नीति किसी की भी हो सकती है. हमें किसी से बैर भी नहीं है और न ही किसी से अधिक दोस्ती है."
व्याख्यानमाला के तीसरे सत्र यानी बुधवार को मोहन भागवत लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देंगे.
ये प्रश्न लिखित रूप से पूछे जा रहे हैं क्योंकि समारोह में आने वाले हर व्यक्ति को एक फ़ॉर्म दिया गया है जिसके ज़रिये वो अपने सवाल पूछ सकते हैं.

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